मुजफ्फरनगर में बेसहारा गौवंश के अंतिम संस्कार की व्यवस्था न होने को लेकर गौसेवकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। वर्षों से सेवा कार्य में लगे गौसेवकों ने नगर पालिका परिषद पर लगातार अनदेखी का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि प्रशासन की उदासीनता के कारण उन्हें मृत पशुओं का अंतिम संस्कार असम्मानजनक परिस्थितियों में करना पड़ रहा है, जो धार्मिक और मानवीय दोनों दृष्टिकोण से गलत है।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे गौसेवक नीशू ने बताया कि वे और उनके साथी लंबे समय से शहर में बेसहारा गौवंश की देखभाल कर रहे हैं, लेकिन जब इन पशुओं की मृत्यु हो जाती है, तो उनके सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए कोई तय स्थान नहीं है। मजबूरी में उन्हें अलग-अलग जगहों पर अंतिम संस्कार करना पड़ता है, जिससे कई बार स्थानीय लोगों को भी असुविधा होती है और धार्मिक भावनाएं भी आहत होती हैं।
गौसेवकों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखी हैं। उन्होंने मांग की है कि मृत पशुओं के अंतिम संस्कार के लिए कम से कम पाँच बीघा जमीन आवंटित की जाए। इसके साथ ही उस स्थान पर चारदीवारी बनाई जाए और आवश्यक सामग्री रखने के लिए एक कमरा भी तैयार किया जाए। इसके अलावा शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को देखते हुए नसबंदी और उपचार केंद्र खोलने की मांग की गई है। बंदरों के बढ़ते आतंक से निजात दिलाने के लिए उन्हें वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की भी मांग उठाई गई है।
प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई न होने से नाराज गौसेवकों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया है। उन्होंने ऐलान किया है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से काम नहीं होता, वे नंगे पांव रहकर आंदोलन जारी रखेंगे। उनका कहना है कि वे कई बार नगर पालिका के अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है, कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में गौसेवकों के साथ स्थानीय नागरिक भी शामिल हुए। सभी ने एकजुट होकर नगर पालिका प्रशासन से जल्द से जल्द समाधान निकालने की मांग की है, ताकि बेसहारा पशुओं को भी सम्मानजनक विदाई मिल सके।

