मुजफ्फरनगर, 14 जून। केन्द्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जिले में चलाए जा रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत आयोजित ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ में किसानों को मिट्टी की बिगड़ती सेहत को खेती के लिए गंभीर खतरा बताते हुए जागरूक किया गया। वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यदि समय रहते मृदा संरक्षण और संतुलित खेती के उपाय नहीं अपनाए गए तो उत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। किसानों से प्राकृतिक खेती, हरी खाद और जैव उर्वरकों के अधिक से अधिक उपयोग की अपील की गई।
अभियान के तहत कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र बघरा और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम ने दो विकास खंडों की छह ग्राम पंचायतों में पहुंचकर किसानों को वैज्ञानिक खेती की विस्तृत जानकारी दी। विकास खंड बघरा के ग्राम निरमानी, खेड़ी दूधाधारी और साल्हाखेड़ी तथा विकास खंड शाहपुर के ग्राम जीवना, बहादुरपुर गढ़ी और बसथड़ा में आयोजित कार्यक्रमों में किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, फसल उत्पादन बढ़ाने और खेती की लागत कम करने के उपाय बताए गए।
ग्राम निरमानी और खेड़ी दूधाधारी में कृषि विज्ञान केन्द्र बघरा की वैज्ञानिक डॉ. सविता आर्या ने किसानों को मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है, इसलिए मृदा प्रबंधन, हरी खाद और जैव उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। साथ ही किसानों को जैविक अनाज उत्पादन के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कृषि विभाग के विकास कुमार ने किसानों को फार्मर रजिस्ट्री और फसल बीमा योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए योजनाओं का लाभ समय पर लेने के लिए आवश्यक प्रक्रिया समझाई।
भूमि संरक्षण विभाग के अवर अभियंता रविन्द्र कुमार ने किसानों को मृदा संरक्षण के महत्व के साथ खेत तालाब योजना की जानकारी दी और बताया कि जल संरक्षण के माध्यम से खेती को अधिक सुरक्षित और लाभकारी बनाया जा सकता है।
वहीं कृषि विभाग के नीटू कुमार ने फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कीटों और रोगों की पहचान, रोकथाम और वैज्ञानिक नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से समय-समय पर खेतों का निरीक्षण करने और आवश्यकता अनुसार ही कीटनाशकों का प्रयोग करने की अपील की।
अभियान के दौरान अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने किसानों से वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर मिट्टी की सेहत सुधारने, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने और टिकाऊ खेती की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया, ताकि आने वाले समय में कृषि उत्पादन के साथ किसानों की आय भी सुरक्षित और बेहतर हो सके।

