Thursday, October 1, 2026

बाल विवाह अपराध है” – मुजफ्फरनगर में छात्राओं ने ली सख्त शपथ।




मुजफ्फरनगर, 5 फरवरी 2026।
मैं न बाल विवाह करूंगी, न करने दूंगी”—इस सशक्त संकल्प के साथ कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय (नगरीय क्षेत्र) की बालिकाओं ने बाल विवाह के खिलाफ आवाज बुलंद की। जनपद को बाल विवाह मुक्त बनाने के उद्देश्य से विद्यालय परिसर में बाल विवाह एवं उसके दुष्परिणामों पर कार्यशाला और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बालिकाओं को कानून, दुष्परिणाम और रोकथाम के उपायों की स्पष्ट व सरल जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया गया कि बाल विवाह कानूनी अपराध है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर 02 वर्ष की सजा और 01 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत में विवाह हेतु लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष निर्धारित है।

बालिकाओं को यह भी समझाया गया कि बाल विवाह के कारण शिक्षा बाधित, स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे, मानसिक-सामाजिक नुकसान और भविष्य असुरक्षित हो जाता है। इसी के साथ रोकथाम के लिए त्वरित सहायता के उपाय बताए गए—पुलिस आपातकालीन सेवा 112, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अथवा स्थानीय पुलिस को तुरंत सूचना देने की अपील की गई।

कार्यशाला में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विषय की बेहतर समझ दिखाने वाली 13 बालिकाओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, ताकि अन्य छात्राओं में भी जागरूकता और साहस बढ़े। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय की वार्डन सुश्री बबिता शर्मा और अध्यापक ममता शर्मा का विशेष सहयोग रहा।

यह जनजागरूकता कार्यक्रम जिलाधिकारी श्री उमेश मिश्रा एवं मुख्य विकास अधिकारी श्री कण्डारकर कमल किशोर देशभूषण के निर्देशन में आयोजित हुआ। बालिका शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान, संरक्षण और स्वावलंबन को केंद्र में रखते हुए जिला बाल संरक्षण अधिकारी संजय कुमार तथा बाल कल्याण समिति के डॉ. राजीव कुमार द्वारा बालिकाओं को कानून की सही जानकारी देकर उन्हें खुद और दूसरों की सुरक्षा के लिए सजग किया गया।

कार्यक्रम का संदेश साफ था—बाल विवाह न केवल गलत, बल्कि अपराध है। सही जानकारी, समय पर सूचना और सामूहिक संकल्प से ही जनपद को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सकता है।

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