मुजफ्फरनगर। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन सेवा योजना के तहत संचालित मिनी बसों के निजी संचालकों का गुस्सा गुरुवार को खुलकर सामने आ गया। अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर करीब 20 मिनी बसों के साथ संचालकों ने एआरटीओ कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। बसों को कार्यालय परिसर में खड़ा कर संचालकों ने साफ चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे बसों का संचालन बंद करने के लिए मजबूर होंगे।
प्रदर्शन कर रहे बस संचालकों का कहना है कि मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन सेवा योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना था, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संचालकों का आरोप है कि एक ओर अवैध डग्गामारी वाहन खुलेआम सवारियां ढो रहे हैं, जबकि दूसरी ओर नियमों का पालन करने वाले बस संचालकों पर लगातार चालान किए जा रहे हैं। इससे उनका व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और आर्थिक नुकसान लगातार बढ़ता जा रहा है।
बस मालिक संजय मलिक ने बताया कि उन्होंने शासन की योजना पर भरोसा कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत टेंडर लेकर बसों का संचालन शुरू किया था। उनका कहना है कि प्रदेश के कई जिलों में यह योजना पहले ही दम तोड़ चुकी है और अब मुजफ्फरनगर में भी हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बस अड्डों और प्रमुख स्थानों से उनकी बसों को सवारियां नहीं उठाने दी जातीं, जबकि अवैध वाहन बिना किसी रोक-टोक के संचालन कर रहे हैं। इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस द्वारा लगातार चालान किए जाने से संचालकों की कमर टूट चुकी है।
संचालकों ने यह भी आरोप लगाया कि बसों के लिए उचित पार्किंग व्यवस्था नहीं है। मुख्यालय तक संचालन में भी कई तरह की प्रशासनिक और व्यावहारिक बाधाएं सामने आती हैं। इन परिस्थितियों में बसों का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन सेवा योजना जिले में पूरी तरह ठप हो सकती है।
संजय मलिक ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना को स्थानीय स्तर पर पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि बस संचालक अपनी पीड़ा सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाना चाहते हैं। लखनऊ जाकर बसों की चाबियां सौंपना संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से अपनी बसों को एआरटीओ कार्यालय परिसर में खड़ा कर विरोध दर्ज कराया है। यह कदम उनकी बढ़ती नाराजगी और आर्थिक संकट को दर्शाता है।
प्रदर्शन में शामिल बस चालक अमजद ने कहा कि लगातार हो रही कार्रवाई और घटती आय के कारण चालकों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो कई परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।
उधर, संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) अजय मिश्र ने बस संचालकों की समस्याओं को गंभीरता से लेने की बात कही। उन्होंने बताया कि संचालकों द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दे रूट संचालन से जुड़े हुए हैं। इस संबंध में रोडवेज के एआरएम, जो इस योजना के नोडल अधिकारी हैं, उनसे भी बातचीत की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी समस्याओं को सुनकर उनके समाधान का प्रयास किया जाएगा।
एआरटीओ ने यह भी कहा कि जिले में अवैध डग्गामारी वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग और यातायात पुलिस लगातार अभियान चला रहे हैं। ऐसे वाहनों पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी ताकि वैध रूप से संचालित वाहनों को राहत मिल सके।
फिलहाल बस संचालकों के इस विरोध ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन सेवा योजना की जमीनी चुनौतियों को उजागर कर दिया है। यदि प्रशासन और संबंधित विभाग जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकालते हैं तो जिले में ग्रामीण परिवहन व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, जिससे हजारों यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

