बुढाना, 20 अप्रैल 2026।
बाल विकास और बच्चों के बेहतर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बुढाना में नव निर्मित बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय का विधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें विभागीय अधिकारियों और स्टाफ की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस अवसर को और भी खास बनाते हुए 8वें पोषण पखवाड़ा (9 से 23 अप्रैल 2026) के अंतर्गत एक कार्यशाला और जन-जागरूकता कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम “जीवन के पहले 6 वर्षों में मस्तिष्क का अधिकतम विकास” रखी गई है, जो बच्चों के शुरुआती विकास की गंभीरता और महत्व को दर्शाती है।
कार्यक्रम का आयोजन जिला प्रशासन के निर्देशन में किया गया। इसमें जिला अधिकारी श्री उमेश मिश्रा, मुख्य विकास अधिकारी श्री कमल किशोर देशभूषण कण्डारकर और जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री सुशील कुमार के मार्गदर्शन की अहम भूमिका रही।
शुभारंभ के दौरान बाल विकास परियोजना अधिकारी श्रीमती संतोष तोमर, डॉ. राजीव कुमार, सुपरवाइजर सुश्री ईशा त्यागी, सुश्री शिवानी, सुश्री दीपा सैनी और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर श्री अमित सैनी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यालय की शुरुआत की। इस मौके पर डॉ. राजीव कुमार द्वारा परियोजना अधिकारी को सम्मानित भी किया गया और पूरे स्टाफ को शुभकामनाएं दी गईं।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बच्चों के शुरुआती छह वर्षों को बेहद संवेदनशील और निर्णायक बताया। इस दौरान बताया गया कि इसी अवधि में बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 80-90% विकास हो जाता है, इसलिए सही पोषण, देखभाल और वातावरण बेहद जरूरी है।
पोषण पखवाड़ा के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:
- शुरुआती विकास पर जोर: 0 से 6 वर्ष की आयु में मस्तिष्क के तेजी से विकास को ध्यान में रखते हुए पोषण और देखभाल पर विशेष ध्यान।
- मातृ एवं शिशु पोषण: गर्भावस्था से लेकर स्तनपान और छोटे बच्चों के आहार तक सही खानपान की जानकारी दी गई।
- अभिभावकों की भूमिका: बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने और घर के बने पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने पर जोर।
- सामुदायिक सहभागिता: आंगनवाड़ी केंद्रों को मजबूत बनाने और जनभागीदारी बढ़ाने की अपील।
इस कार्यक्रम में बुढाना परियोजना की आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों—ममता, विनीता, उमा, पुष्पा, संगीता, सुनीता, रेखा, प्रीति, गीता, निशु, सुधा और प्रियंका सहित अन्य स्टाफ ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
महत्वपूर्ण बात:
यह आयोजन सिर्फ एक कार्यालय के उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बच्चों के उज्ज्वल भविष्य, स्वस्थ समाज और जागरूक अभिभावक बनाने की दिशा में एक मजबूत पहल के रूप में सामने आया।
सरकार और प्रशासन की यह कोशिश साफ संकेत देती है कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर विकास के लिए अब जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

