मुजफ्फरनगर में पंचायत चुनावों में लगातार हो रही देरी और ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जाने की संभावना को लेकर अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई है। सोमवार को संगठन के पदाधिकारियों और ग्राम प्रधानों का एक प्रतिनिधिमंडल खंड विकास कार्यालय पहुंचा, जहां उन्होंने बीडीओ सदर अकसीर खान को ज्ञापन सौंपकर पंचायतों में प्रशासक नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
संगठन की ओर से मुख्यमंत्री Yogi Adityanath और खतौली विधायक Madan Bhaiya को भी पत्र भेजा गया है। ज्ञापन में कहा गया कि पंचायत चुनावों में देरी का असर गांवों की विकास व्यवस्था पर पड़ रहा है और इसका नुकसान ग्रामीण जनता को उठाना पड़ सकता है। संगठन ने मांग की कि जब तक चुनाव नहीं हो जाते, तब तक निर्वाचित ग्राम प्रधानों को ही पंचायत संचालन का अधिकार दिया जाए।
संगठन के प्रदेश पदाधिकारी एवं ग्राम प्रधान राहुल देव ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में देरी प्रशासनिक कारणों से हो सकती है, लेकिन इसके आधार पर गांवों में प्रशासक नियुक्त करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ माना जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को जनता ने चुना है और ऐसे में निर्वाचित प्रतिनिधियों की जगह प्रशासनिक अधिकारियों को बैठाने से ग्रामीण विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
राहुल देव ने कहा कि यदि चुनाव समय पर नहीं हो पा रहे हैं तो सरकार को ग्राम प्रधानों को सीमित प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार देकर विकास कार्य जारी रखने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई राज्यों में चुनाव में देरी होने के बावजूद निर्वाचित पंचायतों को काम करने की अनुमति दी जाती है, जबकि उत्तर प्रदेश में पंचायत व्यवस्था को कमजोर करने की आशंका जताई जा रही है।
ज्ञापन में संगठन ने तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली, पंचायतों में प्रशासक नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए। दूसरी, चुनाव होने तक मौजूदा निर्वाचित ग्राम पंचायतों को कार्य करने दिया जाए। तीसरी, ग्राम प्रधानों को आवश्यक प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार दिए जाएं ताकि गांवों में विकास कार्य प्रभावित न हों।
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में धरना-प्रदर्शन और आंदोलन शुरू किया जाएगा। वहीं बीडीओ अकसीर खान ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है।
प्रशासन की ओर से फिलहाल किसी बड़े फैसले की घोषणा नहीं की गई है। अधिकारियों ने कहा कि शासन स्तर पर जो भी निर्देश मिलेंगे, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में शांति और व्यवस्था बनाए रखने की अपील भी की गई है।

