इंसानियत सबसे बड़ा धर्म: हिन्दू-मुस्लिमों ने मिलकर बुजुर्ग को दी अंतिम विदाई।
खबर उत्तर प्रदेश के जनपद मेरठ से है।
क्रांतिधरा मेरठ में एक बार फिर सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल देखने को मिली। नौगजा-खंदक बाजार इलाके में सोमवार को करीब 80 वर्षीय बुजुर्ग सूरज प्रकाश पंजाबी के निधन के बाद हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर उनकी अर्थी को कंधा दिया और अंतिम संस्कार में सहयोग कर इंसानियत की अनोखी मिसाल पेश की।
बताया जाता है कि सूरज प्रकाश पंजाबी पिछले कई दशकों से नौगजा-खंदक बाजार इलाके में कमल भड़ाना पुत्र प्रेम सिंह भड़ाना के परिवार के साथ रह रहे थे। वह अविवाहित थे और वर्ष 1968 से इसी परिवार का हिस्सा बनकर जीवन व्यतीत कर रहे थे। लंबे समय से मोहल्ले में रहने के कारण उनका सभी लोगों से गहरा लगाव था और वह सभी के साथ मिलजुलकर रहते थे।
सोमवार को उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। सूचना मिलने पर उनकी भतीजी भी मौके पर पहुंच गई। बुजुर्ग के अंतिम संस्कार के समय हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग बड़ी संख्या में एकत्र हुए और सभी ने मिलकर उनकी अर्थी को कंधा दिया। इसके बाद मेरठ के सूरजकुंड श्मशान घाट पर पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया गया।
मोहल्ले के लोगों का कहना है कि सूरज प्रकाश पंजाबी भले ही हिन्दू परिवार में रहते थे, लेकिन इलाके के मुस्लिम समाज से भी उनका गहरा जुड़ाव था। हर सुख-दुख में वह सभी के साथ खड़े रहते थे, इसलिए उनके निधन पर पूरा मोहल्ला एकजुट होकर अंतिम विदाई देने पहुंचा।
इस मौके पर स्पोर्ट्स कारोबारी विपिन मनोठिया ने कहा कि यह घटना गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत मिसाल है। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण समाज को यह संदेश देते हैं कि इंसानियत और भाईचारा किसी भी धर्म या जाति से बड़ा होता है।
इलाके के लोगों का कहना है कि आज के समय में जब समाज में छोटी-छोटी बातों पर तनाव पैदा हो जाता है, ऐसे में मेरठ के इस मोहल्ले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सच्चा रिश्ता इंसानियत का होता है, जो हर धर्म और हर दीवार से ऊपर होता है।
जनपद मेरठ से संवाददाता दीपक वर्मा की रिपोर्ट।

