बिजनौर लोकसभा क्षेत्र में छुट्टी के दिन भी जनसेवा की मजबूत और गंभीर तस्वीर सामने आई। चंदन सिंह चौहान अपने आवास पर जनता दर्शन एवं जनसुनवाई करते नजर आए। सुबह से ही क्षेत्र के अलग-अलग गांवों, कस्बों और दूरदराज इलाकों से बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। आवास परिसर में फरियादियों की लंबी कतारें देखी गईं।
जनता ने सड़क निर्माण में देरी, खराब विद्युत व्यवस्था, पेयजल संकट, अस्पतालों में सुविधाओं की कमी, पेंशन रुकने, राशन कार्ड में गड़बड़ी, राजस्व विवाद, भूमि पैमाइश, कब्जे के मामले और पुलिस प्रशासन से जुड़ी शिकायतें विस्तार से रखीं। कई लोग दस्तावेजों और आवेदन पत्रों के साथ पहुंचे, जिनमें महीनों से लंबित मामलों का उल्लेख था।
जनसुनवाई के दौरान सांसद ने एक-एक व्यक्ति की बात ध्यानपूर्वक सुनी। कई मामलों में तुरंत संबंधित विभागीय अधिकारियों को फोन मिलाकर जवाब तलब किया गया। कुछ मामलों में सख्त लहजे में निर्देश देते हुए कहा गया कि शिकायतों का निस्तारण तय समयसीमा में सुनिश्चित किया जाए। जिन मामलों में तत्काल समाधान संभव नहीं था, उनमें लिखित शिकायत लेकर स्पष्ट आदेश दिए गए कि प्रगति रिपोर्ट सीधे उपलब्ध कराई जाए।
इस दौरान स्पष्ट संदेश दिया गया कि जनता की समस्या को टालना या फाइलों में दबाना स्वीकार नहीं होगा। लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने और लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय करने की बात भी कही गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और शिकायतकर्ता को बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें।
ग्रामीण इलाकों से आए लोगों ने कहा कि छुट्टी के दिन भी सांसद का उपलब्ध रहना उनके लिए राहत की बात है। कई फरियादियों ने बताया कि पहले भी उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से कराया गया है, जिससे उन्हें सीधे जनप्रतिनिधि से संवाद का भरोसा मिला है। महिलाओं और बुजुर्गों की भी बड़ी संख्या मौजूद रही, जिन्होंने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं रखीं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लगातार जनता के बीच सक्रिय रहना, सीधे संवाद की व्यवस्था बनाना और प्रशासनिक स्तर पर सख्ती दिखाना जनप्रतिनिधित्व की गंभीरता को दर्शाता है। बिजनौर लोकसभा क्षेत्र में यह जनसुनवाई केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जवाबदेही और जनसंपर्क की मजबूत पहल के रूप में देखी जा रही है।
छुट्टी के दिन खुले दरबार ने यह संदेश दिया कि जनसेवा के लिए कोई दिन तय नहीं होता। क्षेत्र में इस पहल की चर्चा तेज है और इसे सक्रिय जनप्रतिनिधित्व की मिसाल बताया जा रहा है।
— सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट।

