Friday, October 2, 2026

“घर खाली नहीं किया तो पूरे खानदान को मिटा दूंगा मुजफ्फरनगर में बुजुर्ग परिवार पर दबंगों का कहर!



मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कानून-व्यवस्था और भू-माफियाओं के बढ़ते आतंक पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के खालापार इलाके में एक कीमती प्लॉट को लेकर चल रहा विवाद अब खुलेआम दबंगई, मारपीट, जान से मारने की धमकी और कथित पुलिस निष्क्रियता तक पहुंच चुका है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि रसूखदार दबंग गैंगस्टर के नाम का खौफ दिखाकर उनकी जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं और विरोध करने पर पूरे परिवार को खत्म करने की धमकियां दी जा रही हैं।

गुरुवार को रुड़की रोड स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए खालापार निवासी बुजुर्ग फजल अहमद की आंखें भर आईं। उन्होंने मीडिया के सामने जो कहानी सुनाई, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया।

1980 से कब्जे में था प्लॉट, अब शुरू हुआ विवाद

फजल अहमद के मुताबिक उनके घर से सटे एक प्लॉट का बैनामा वर्ष 1980 में उनके नाम हुआ था। वह पिछले कई दशकों से उस जमीन पर शांतिपूर्ण तरीके से काबिज थे। लेकिन 26 जनवरी 2026 को इलाके के ही शादाब नामक व्यक्ति ने कथित रूप से प्लॉट के सामने वाले हिस्से का फर्जी बैनामा अपनी पत्नी के नाम करा लिया।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि यह पूरा खेल दबंगई और रसूख के दम पर किया गया। फजल अहमद ने दावा किया कि आरोपी शादाब का संबंध कुख्यात गैंगस्टर नईम कुरैशी से है और उसी के नाम का डर दिखाकर इलाके में दहशत फैलाई जा रही है।

विकलांग पत्नी के साथ मारपीट, वीडियो होने के बावजूद कार्रवाई नहीं

फजल अहमद ने 9 फरवरी 2026 की घटना को याद करते हुए बताया कि वह अपनी विकलांग पत्नी सलमा के साथ प्लॉट पर मौजूद थे। तभी शादाब अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा और दोनों के साथ मारपीट शुरू कर दी।

पीड़ित बुजुर्ग का आरोप है कि उनकी पत्नी को भी नहीं बख्शा गया। उन्हें धक्का देकर जमीन से बाहर निकाल दिया गया। फजल अहमद का कहना है कि पूरी घटना का वीडियो उनके मोबाइल में मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने न मेडिकल कराया और न ही आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

परिवार का आरोप है कि पुलिस की इसी ढिलाई का फायदा उठाकर आरोपियों ने विवादित जमीन पर तेजी से निर्माण कार्य शुरू कर दिया।

मुख्यमंत्री तक पहुंची गुहार, फिर भी जारी रहा निर्माण

स्थानीय पुलिस से निराश होकर फजल अहमद सीधे गोरखपुर स्थित मुख्यमंत्री जनता दरबार पहुंचे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने भू-माफियाओं और दबंगों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न की पूरी जानकारी मुख्यमंत्री को दी।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर जांच टीम भी पीड़ित परिवार के घर पहुंची और बयान दर्ज किए गए। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि मामला मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंचने के बावजूद भी स्थानीय स्तर पर आरोपियों का मनोबल कम नहीं हुआ और निर्माण कार्य लगातार चलता रहा।

डर के साए में जी रहा परिवार

पीड़ित परिवार का कहना है कि 9 फरवरी की घटना के बाद उनका बेटा लताफत इतना डर गया कि उसे अपना घर छोड़कर कोतवाली नगर क्षेत्र में छिपकर रहना पड़ा। लेकिन आरोप है कि वहां भी दबंगों ने उसका पीछा नहीं छोड़ा।

17 अप्रैल 2026 को कथित तौर पर लताफत पर हमला करने के लिए गुर्गे भेजे गए। जब वह नहीं मिला तो घर के बाहर खड़ी गाड़ी में तोड़फोड़ की गई और उसमें रखा सामान चोरी कर लिया गया। परिवार का आरोप है कि इस मामले में भी पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

“किसी भी थाने में चले जाओ, मेरे खिलाफ FIR नहीं होगी”

मामला तब और भयावह हो गया जब 16 मई 2026 की रात करीब 9:38 बजे आरोपी कथित तौर पर फजल अहमद के घर में घुस आया। पीड़ित परिवार के अनुसार घर के सामान में तोड़फोड़ की गई, गालियां दी गईं और पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई।

परिवार का दावा है कि आरोपी ने खुलेआम कहा—

> “अगर घर खाली नहीं किया तो पूरे खानदान को मिटा दूंगा… किसी भी थाने में चले जाओ, मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होगी।”



पीड़ित परिवार का कहना है कि यह पूरी वारदात घर में लगे CCTV कैमरों में कैद है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो, इंसाफ की मांग तेज

लगातार धमकियों और पुलिस कार्रवाई न होने से परेशान फजल अहमद ने अब सोशल मीडिया का सहारा लिया है। उन्होंने वीडियो और अपनी आपबीती सार्वजनिक करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

परिवार ने आरोपियों पर “बुलडोजर एक्शन” चलाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है।

अब पूरे जिले की नजर मुजफ्फरनगर पुलिस और प्रशासन पर टिकी हुई है। सवाल यह है कि क्या वायरल वीडियो, CCTV फुटेज और मीडिया में मामला आने के बाद दबंगों पर कार्रवाई होगी या फिर एक बुजुर्ग परिवार यूं ही डर के साए में जीने को मजबूर रहेगा।

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