Friday, October 2, 2026

कचहरी में बुजुर्ग की भीड़ ने की पिटाई, वायरल वीडियो ने उठाए कानून व्यवस्था पर सवाल।






मुज़फ़्फ़रनगर। जनपद की कचहरी परिसर से मानवता को झकझोर देने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में करीब 70 वर्षीय एक बुजुर्ग व्यक्ति को कुछ लोग कथित पॉकेटमार बताकर पकड़ते, घसीटते और उसके साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। घटना बुधवार सुबह लगभग 11 बजे की बताई जा रही है। वीडियो सामने आने के बाद न केवल भीड़तंत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं, बल्कि यह मामला कानून व्यवस्था और पुलिस प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर चर्चा का विषय बन गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कचहरी परिसर में मौजूद कुछ लोगों ने बुजुर्ग पर एक व्यक्ति की जेब से पर्स निकालने का आरोप लगाया। दावा किया गया कि उसे कथित रूप से रंगे हाथ पकड़ लिया गया था। आरोप लगते ही मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और बिना किसी आधिकारिक जांच या पुलिस कार्रवाई का इंतजार किए कुछ लोगों ने बुजुर्ग के साथ मारपीट शुरू कर दी।

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि भीड़ बुजुर्ग को पकड़कर डीएम कार्यालय की ओर ले जा रही है। इस दौरान बुजुर्ग खुद को निर्दोष बताता रहा, लेकिन उसकी बात सुनने के बजाय लोग उस पर आरोप लगाते रहे। वीडियो में यह भी दिखाई देता है कि चलते-चलते बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद कुछ संवेदनशील लोगों ने हस्तक्षेप करते हुए उसे भीड़ से अलग किया और पानी पिलाकर राहत देने का प्रयास किया।

जानकारी के अनुसार बुजुर्ग के पास मिले आधार कार्ड के आधार पर उसकी पहचान सहारनपुर की मुनीम कॉलोनी निवासी के रूप में हुई है। वायरल वीडियो में बुजुर्ग भावुक होकर अपनी सफाई देते हुए कहता नजर आ रहा है कि उसकी बेटी अपने प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली गई है। उसे सूचना मिली थी कि उसकी बेटी मुज़फ़्फ़रनगर में कोर्ट मैरिज करने वाली है। इसी सूचना के आधार पर वह अपनी बेटी की तलाश में कचहरी पहुंचा था।

हालांकि वीडियो में मौजूद कुछ लोग यह दावा करते भी सुनाई दे रहे हैं कि उक्त व्यक्ति पहले भी जेब काटने की घटनाओं में पकड़ा जा चुका है। लेकिन इस दावे की अब तक किसी सक्षम अधिकारी या पुलिस विभाग द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि बुजुर्ग पर लगाए गए आरोप कितने सही हैं और कितने गलत।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बुजुर्ग वास्तव में किसी अपराध में संलिप्त था तो उसे पुलिस के हवाले क्यों नहीं किया गया और यदि वह निर्दोष था तो उसके साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट क्यों की गई। हैरानी की बात यह भी है कि पूरे घटनाक्रम के बावजूद पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई और न ही किसी पक्ष की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है।

वायरल वीडियो के सामने आने के बाद लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कानून के जानकारों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति पर आरोप लगने मात्र से उसे दोषी नहीं माना जा सकता। जांच और कार्रवाई का अधिकार केवल कानून और पुलिस को है। ऐसे मामलों में भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेना न केवल गैरकानूनी है बल्कि कई बार निर्दोष लोगों के साथ अन्याय का कारण भी बन सकता है।

फिलहाल मामले को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।संभावित सबहेड:पॉकेटमारी के आरोप में घिरे बुजुर्ग ने खुद को बताया बेगुनाह, बेटी की तलाश में कचहरी आने का किया दावा; शिकायत न होने से मामला रहस्य बना।”

Latest news
Related news