मुजफ्फरनगर। होलिका दहन के अवसर पर जनपद में आस्था का ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। शहर और आसपास के क्षेत्रों में होलिका स्थलों पर मेले जैसा वातावरण रहा, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं अपने बच्चों के साथ पूजा-अर्चना करने पहुंचीं।
शाम ढलते ही होलिका स्थलों पर भीड़ बढ़ने लगी। महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार रोली, मौली, कच्चा सूत, गेहूं की बालियां और जल अर्पित कर परिक्रमा की। परिवार की सुख-समृद्धि, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और घर की खुशहाली की कामना की गई। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से लोकगीत गाए, जिससे माहौल पूरी तरह धार्मिक रंग में रंगा नजर आया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर साल बड़ी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क दिखाई दिया। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती रही और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
धार्मिक मान्यता के अनुसार होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इसी विश्वास के साथ महिलाओं ने अपने परिवार की रक्षा और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
मुजफ्फरनगर में इस बार का होलिका दहन सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और पारिवारिक मूल्यों का सशक्त संदेश देता नजर आया — जहां आस्था, परंपरा और विश्वास ने मिलकर त्योहार को खास बना दिया।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट।

