UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त सुनवाई
नई दिल्ली।
UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बड़ी सुनवाई शुरू हो गई है। इन नियमों के खिलाफ दाखिल कई याचिकाओं पर गुरुवार को कोर्ट ने सुनवाई की, जिसमें संविधान और समानता के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत में कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान संरक्षण देता है। हर वर्ग की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन UGC के नए नियम समाज में भ्रम पैदा करते हैं और भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि नियमों में केवल OBC, SC और ST वर्ग का उल्लेख किया गया है, जबकि अन्य वर्गों के अधिकारों को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया।
इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि कोर्ट का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि क्या UGC के नए नियम संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार के अनुरूप हैं या नहीं। कोर्ट यह देखेगा कि नियम किसी भी वर्ग के साथ असमान व्यवहार तो नहीं करते।
सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसका असर देश की उच्च शिक्षा नीति, आरक्षण व्यवस्था और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर पड़ सकता है। अगर कोर्ट को लगेगा कि नियम संविधान के खिलाफ हैं, तो सरकार और UGC को इन्हें संशोधित करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल शिक्षा नीति का नहीं, बल्कि संविधान में दिए गए समान अधिकारों की परीक्षा है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश की शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक संतुलन पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखी है और अगली तारीख पर विस्तृत बहस होने की संभावना है।

