उन्नाव से बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर बेहद तीखा और राजनीतिक रूप से गंभीर बयान दिया है। अपने वक्तव्य में उन्होंने शंकराचार्य के गुरु स्वामी स्वरूपानंद महाराज पर भी निशाना साधते हुए उन्हें “विशुद्ध कांग्रेसी” बताया।
साक्षी महाराज ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान देशभर के साधु-संतों और संन्यासियों को ‘अखिल भारतीय संत समिति’ के मंच पर एकजुट किया गया था, लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद के गुरु स्वामी स्वरूपानंद उस मंच पर नहीं आए। उन्होंने आरोप लगाया कि वे कांग्रेस के समर्थक थे और पूरी तरह उसके पक्ष में खड़े थे।
सांसद ने आगे कहा कि जिस प्रकार उनके गुरु कांग्रेस समर्थक थे, उसी प्रकार अविमुक्तेश्वरानंद भी कांग्रेस की लाइन पर चल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राम भक्तों और संतों पर हुए अत्याचारों को भुलाया नहीं जा सकता। अपने बयान में उन्होंने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का नाम लेते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान “डंडों से पिटवाया गया, गोलियां चलवाई गईं और सरयू का पानी लाल हो गया।” साक्षी महाराज ने दावा किया कि उन्होंने स्वयं उन लाशों को उठाया था।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने राम भक्तों पर गोली चलवाई, वे आज संतों के सम्मान की बात कर रहे हैं, जो आश्चर्यजनक है। साक्षी महाराज ने अखिलेश यादव से हिंदू समाज से हाथ जोड़कर क्षमा मांगने की मांग की।
अपने बयान के अंत में साक्षी महाराज ने कहा कि “हर भगवा वस्त्र पहनने वाला व्यक्ति सन्यासी या साधु नहीं हो सकता। कपड़े रंग लेने से कोई संत नहीं बन जाता, कपड़े तो रावण ने भी रंगे थे।”
साक्षी महाराज का यह बयान ऐसे समय आया है जब धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमाई हुई है। उनके इस बयान से राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

