उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद के शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव तावली स्थित मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया में बुधवार को सालाना जलसा एवं दस्तरबंदी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान दीनी तालीम पूरी करने वाले कुल 54 छात्रों की दस्तरबंदी की गई। इनमें 13 छात्रों ने मुफ्ती, 12 ने आलिम, 20 ने हाफिज, 6 ने क़ारी और 10 छात्रों ने आलिम की डिग्री हासिल की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी रहे। मंच से संबोधन के दौरान उन्होंने समाज में बढ़ती फतवों की प्रवृत्ति पर बेहद तीखे शब्दों में चिंता जताई। शाही इमाम ने कहा कि आज हर व्यक्ति दूसरों के खिलाफ फतवा चाहता है—
किसी को प्रधान के खिलाफ, किसी को मौलवी के खिलाफ, किसी को अपने भाई या पड़ोसी के खिलाफ, यहां तक कि खुदा के खिलाफ भी फतवा चाहिए, लेकिन कोई भी अपने गुनाहों और गलतियों के लिए फतवा लेने नहीं जाता।
उन्होंने कहा कि जो लोग यह दावा करते हैं कि वे सच बोलते हैं और जो कहना है मुंह पर कहते हैं, दरअसल वही सबसे बड़े बेईमान हैं। क्योंकि जो सच बोलना जानता है, वह यह स्वीकार नहीं करता कि उसने किसी की इज्जत पर गलत नजर रखी या अपने भाई-बहन का हक मारा। शाही इमाम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाज में आत्ममंथन खत्म होता जा रहा है और लोग दूसरों को कटघरे में खड़ा करने में लगे हैं।
कार्यक्रम के दौरान शाही इमाम ने मदरसे के छात्रों को पगड़ी पहनाकर और गले में मेडल डालकर सम्मानित किया तथा उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने उलेमा-ए-कराम और छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि इस्लाम प्रेम, मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम देता है। हमें अपने वतन, अपने मुल्क और अपने समाज से मोहब्बत करनी चाहिए और दुनिया को इंसानियत का संदेश देना चाहिए।
मीडिया से बातचीत में मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो बच्चे परीक्षा में पिछड़ जाते हैं, उन्हें दोबारा अच्छे स्कूल या कॉलेजों में दाखिला नहीं मिल पाता, जबकि अच्छे नंबर लाने वालों के लिए रास्ते खुल जाते हैं। उन्होंने शिक्षा से जुड़े सभी संस्थानों—स्कूल, कॉलेज और मदरसों—से अपील की कि पढ़ाई में पीछे रह गए बच्चों को एक और मौका देकर आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए।
जामिया मिलिया से जुड़े एक प्रोफेसर द्वारा छात्र के साथ कथित मारपीट के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें मामले की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन किसी भी शिक्षक द्वारा छात्र या किसी व्यक्ति के साथ ऐसा व्यवहार कभी भी उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने समाज और शिक्षा व्यवस्था को नैतिकता और संवेदनशीलता के साथ मजबूत करने पर जोर दिया।
अपने पूरे संबोधन में शाही इमाम ने साफ संदेश दिया कि समाज को फतवों के सहारे दूसरों को दोषी ठहराने की बजाय ईमानदारी, आत्मचिंतन और नैतिक सुधार की राह पर चलना होगा, तभी सामाजिक व्यवस्था मजबूत हो सकती है।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट

