लखनऊ में आज सुबह अली खामेनेई, जो पिछले 37 वर्षों से ईरान के सर्वोच्च नेता थे, के मृत्यु की पुष्टि के बाद शहर में तनाव का माहौल उत्पन्न हुआ। ईरान के राज्य मीडिया और सरकारी स्रोतों ने रविवार को उन्हें अमेरिकी और इजरायली संयुक्त हमले में मारे जाने की बात स्वीकार की है, और देश भर में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है।
इस खबर के तुरंत बाद लखनऊ के छोटे इमामबाड़ा के पास बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए, उन्होंने हाथों में तख्तियां और झंडे लेकर अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारेबाजी की। भीड़ में कुछ लोग रोते हुए नजर आए और उन्होंने विश्व समुदाय से “फौजी कार्रवाई का विरोध” करने की अपील की। पुलिस ने काफी संख्या में जवान तैनात किए ताकि विवादित स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
स्थानीय प्रशासन की ओर से शुक्रवार को ही चेतावनी दी गई थी कि स्थानीय स्तर पर अफवाहों को बढ़ावा न दिया जाए, लेकिन जैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खामेनेई के निधन की खबर फैलने लगी, लोगों की भावनाएँ तात्कालिक प्रतिक्रिया में बदल गयीं। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण रहने का अनुरोध किया और कहा कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा प्रबंध कड़े कर दिए गए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि खामेनेई की मौत मध्य-पूर्व में एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत देती है, क्योंकि उन्होंने तीन दशकों से भी अधिक समय तक ईरान की विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति पर नियंत्रण रखा था, विशेष रूप से अमेरिका और इजराइल से टकराव में। उनके निधन से ईरान के भीतर और बाहरी संघर्ष दोनों ही क्षेत्रों में अनिश्चितता बढ़ सकती है।
लखनऊ में जारी इस स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से निपटाने के लिए प्रशासन और पुलिस एक साथ काम कर रही है, और लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर भरोसा न करें तथा आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लें।

