लखनऊ/अयोध्या।
अयोध्या के राम मंदिर में दान पात्रों से कथित रूप से धनराशि चोरी के मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। यह टीम पूरे प्रकरण की जांच कर 7 दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया पर दान राशि को लेकर लगातार भ्रामक दावे और अफवाहें फैलने के बाद स्थिति स्पष्ट करने के लिए जांच की मांग की गई थी। ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं के बीच गलत संदेश न जाए, इसलिए मामले की पारदर्शी जांच जरूरी है।
जांच टीम में वरिष्ठ अधिकारी शामिल
सूत्रों के अनुसार, गठित SIT में प्रशासन, पुलिस और वित्त विभाग के अनुभवी अधिकारी शामिल किए गए हैं, ताकि मामले की हर पहलू से जांच हो सके। टीम दान प्रबंधन, रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की भी गहन समीक्षा करेगी।
कर्मचारी के घर से बरामदगी का दावा
मामले में सबसे बड़ा मोड़ उस समय बताया जा रहा है जब मंदिर से जुड़े एक कर्मचारी के घर से लगभग 10 लाख रुपये बरामद होने का दावा सामने आया। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह राशि घर के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ छिपाकर रखी गई थी। फिलहाल संबंधित कर्मचारी और एक अन्य व्यक्ति पुलिस हिरासत में बताए जा रहे हैं।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इस पूरे प्रकरण पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं दूसरी ओर, निर्माण समिति से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस मामले पर टिप्पणी करने से परहेज किया और कहा कि उनका ध्यान केवल निर्माण कार्य पर है।

