मेरठ के सावरकर नगर स्थित भगवतपुरा बस्ती में भगवान वाल्मीकि धर्मशाला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक बड़ा हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में संत समाज, सामाजिक संगठनों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया। पूरे आयोजन का माहौल राष्ट्रभावना, सांस्कृतिक चेतना और एकता के संदेश से भरा हुआ था।
कार्यक्रम का संचालन कार्य समिति के महामंत्री लोकेश टंडन ने किया। उन्होंने अपने प्रभावशाली और ऊर्जावान संचालन से पूरे सम्मेलन को व्यवस्थित और जीवंत बनाए रखा, जिससे लोग अंत तक जुड़े रहे।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि पूज्य शास्वानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने संबोधन में हिंदुत्व को केवल धर्म नहीं बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति बताया। उन्होंने समाज से एकजुट रहने, अपनी संस्कृति पर गर्व करने और चुनौतियों का मिलकर सामना करने की बात कही। उन्होंने जातिवाद को समाज के लिए गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि इसे केवल बातों से नहीं, बल्कि सोच बदलकर खत्म करना होगा। उन्होंने भगवान वाल्मीकि के योगदान का उल्लेख करते हुए समाज में उनके महत्व को समझने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि साध्वी ज्ञानानंद रजनी दीदी ने महिलाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी हमेशा से शक्ति का प्रतीक रही है। उन्होंने महिलाओं को जागरूक और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी। साथ ही उन्होंने आधुनिक समय में सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही।
कार्यक्रम में संघ के प्रांत प्रमुख राम अवतार जी ने संगठन के 100 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संघ ने समाज और राष्ट्र निर्माण में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं और युवाओं से सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की।
सम्मेलन की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और वंदे मातरम् के साथ हुई। इसके बाद बच्चों और युवाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। डीप अकैडमी के छात्रों ने “नारी शक्ति” पर प्रस्तुति दी, जबकि सेवा बस्ती के बच्चों ने देशभक्ति गीतों से माहौल उत्साहपूर्ण बना दिया। दुर्गा वाहिनी के बच्चों के दंड प्रदर्शन को भी खूब सराहा गया। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया।
इस आयोजन में पवन अग्रवाल, भारत भूषण, रामकुमार, अमन कुमार, मदन पहलवान, महेश टांक, शिवकुमार, अखिलेश कुमार, मुकेश कुमार, अरविंद अरोड़ा, अरुण मचल, जितेंद्र जिंदल, राजकुमार जाटव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां सामाजिक समरसता और एकता बनाए रखने का संकल्प लिया गया। यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

