Friday, October 2, 2026

मुजफ्फरनगर में गोवंश के नवजात बच्चों की दर्दनाक मौत, कट्टों में भरकर फेंके जा रहे शव। 







मिमलाना रोड पर एक सप्ताह में 11 बछड़ों के शव मिलने का दावा, गौ सेवकों ने अवैध डेरियों पर लगाए गंभीर आरोप, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण को लेकर सरकार लगातार बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन मुजफ्फरनगर के मिमलाना रोड से सामने आई तस्वीरें इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। यहां नवजात बछड़ों और भैंस के बच्चों के शव कट्टों में बंद हालत में सड़क किनारे मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। स्थानीय गौ सेवकों का आरोप है कि कुछ अवैध डेरी संचालक दूध बचाने और खर्च कम करने के लिए नर बछड़ों को जन्म के बाद लावारिस छोड़ देते हैं, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो जाती है।

रात के अंधेरे में मिला नवजात बछड़े का शव

शनिवार देर रात करीब एक बजे स्थानीय गौ सेवक नीशू को सूचना मिली कि मिमलाना रोड स्थित बाबू फार्म के सामने एक कट्टे को आवारा कुत्ते नोच रहे हैं। सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचे। जब कट्टे को खोला गया तो उसमें एक दिन के नवजात बछड़े का शव मिला। गौ सेवकों के अनुसार शव को कुत्तों ने बुरी तरह नोच दिया था। घटना को देखकर मौके पर मौजूद लोग भावुक हो गए। बाद में गौ सेवक ने लकड़ियां एकत्र कर बछड़े का अंतिम संस्कार कराया।

एक सप्ताह में 11 शव मिलने का दावा

गौ सेवक नीशू का कहना है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं है। उनके अनुसार पिछले एक सप्ताह के भीतर इसी क्षेत्र से 11 नवजात बछड़ों के शव बरामद किए जा चुके हैं। उनका आरोप है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध डेरियां संचालित हो रही हैं और वहां नर बछड़ों को बोझ समझकर छोड़ दिया जाता है। भूख-प्यास और उपेक्षा के कारण उनकी मौत हो जाती है, जिसके बाद शवों को कट्टों में भरकर सड़क किनारे फेंक दिया जाता है।

स्थानीय लोगों में बढ़ रहा आक्रोश

मिमलाना रोड के निवासियों ने भी इस स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह के समय सड़क किनारे पड़े कट्टों से तेज बदबू आती है। कई बार जब इन कट्टों को खोला गया तो उनमें गोवंश के शव मिले। लोगों का आरोप है कि लगातार फैल रही गंदगी और शवों के कारण इलाके में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ गई है, जिससे आम नागरिकों और बच्चों की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो गया है।

गौ सेवकों ने उठाए प्रशासन पर सवाल

गौ सेवकों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की है। उनका आरोप है कि मृत गोवंश के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए आज तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। गौ सेवक नीशू ने बताया कि वह पिछले कई महीनों से गोवंश के अंतिम संस्कार के लिए अलग श्मशान भूमि की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

कार्रवाई की मांग तेज

घटना के बाद स्थानीय नागरिकों, गौ भक्तों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से अवैध डेरियों की जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा मृत गोवंश के अंतिम संस्कार के लिए अलग भूमि उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि क्षेत्र में सामने आ रहे आरोपों और लगातार मिल रहे शवों की घटनाओं ने गोवंश संरक्षण व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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