Thursday, October 1, 2026

बजट में गांव और किसानों को अलग पहचान दे सरकार: राकेश टिकैत।



मुजफ्फरनगर।
केंद्र सरकार द्वारा 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले आम बजट को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार से किसानों और गांव के लिए ठोस और अलग बजट व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बजट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें कृषि और ग्रामीण भारत की वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

मुजफ्फरनगर के जाट कॉलोनी स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए टिकैत ने कहा कि गांव की अर्थव्यवस्था में किसान ही नहीं, बल्कि मजदूर, पशुपालक, दूध उत्पादक और मछलीपालक भी शामिल हैं। बजट का सीधा लाभ इन सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए सरकार को बाजार व्यवस्था की निगरानी कर किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना होगा।

राकेश टिकैत ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने और फसलों के सही दाम तय करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने मांग की कि सभी ट्रैक्टरों पर टैक्स में छूट दी जाए, बिजली दरों में राहत मिले और सोलर पैनल पर सब्सिडी बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि अभी सरकार तीन किलोवाट तक सोलर पैनल पर सब्सिडी देती है, जबकि किसानों को दस किलोवाट तक की सुविधा मिलनी चाहिए।

टिकैत ने फसल बीमा योजना में सुधार की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं, जलभराव और मौसम की मार से होने वाले नुकसान का पूरा मुआवजा किसानों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बागवानी किसानों की समस्याओं का भी उल्लेख किया और कहा कि सड़क निर्माण और ट्रकों की आवाजाही में बाधा के कारण उनकी फसलें समय पर मंडी तक नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे भारी नुकसान हो रहा है।

उन्होंने कहा कि किसानों की उपज को मंडी तक पहुंचाने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि किसानों का पलायन रोका जा सके। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भूमि अधिग्रहण में किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिला, तो किसान आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

राकेश टिकैत ने सरकार से मांग की कि बजट में कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के हिस्से को बढ़ाया जाए, ताकि किसानों को सीधा लाभ सब्सिडी, ऊर्जा बचत और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मिल सके। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ेगा।

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