उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद की नई मंडी कोतवाली क्षेत्र के सांवली गांव में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब गांव के नाले से गाय और भैंस के 17 छोटे बच्चों (बछड़ों) के शव बरामद हुए। सभी शव कट्टों में बंद कर नाले में फेंके गए थे, जिससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश और संवेदना का माहौल बन गया।
सूचना मिलने पर गौसेवक निशु पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। क्रेन (जेसीबी) की मदद से नाले से सभी शवों को बाहर निकाला गया। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में सभी मृत बछड़ों का अंतिम संस्कार किया गया। जानकारी के अनुसार, मृत पशुओं में 15 गाय के बछड़े और 2 भैंस के बच्चे शामिल हैं।
स्थानीय लोगों और गौसेवकों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। लगभग एक माह पहले भी इसी नाले से करीब 25 बछड़ों के शव मिले थे। इसके अलावा, समय-समय पर यहां एक-दो मृत पशुओं के शव मिलने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।
गौसेवक निशु ने आरोप लगाया कि डेरी संचालक दूध न देने वाली गायों और मृत बछड़ों को इस तरह कट्टों में बंद कर नाले में फेंक देते हैं। उनका कहना है कि इससे न केवल गौवंश की दुर्दशा होती है, बल्कि यह मानवता और कानून दोनों के खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि दोषी डेरी संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो।
इस घटना के बाद सनातनी समाज और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि गौवंश संरक्षण की बातें तो होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर लापरवाही साफ नजर आती है। हैरानी की बात यह है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद जिले का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी खुलकर बयान देने को तैयार नहीं है।
स्थानीय लोगों और गौसेवकों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले की सभी डेयरियों का निरीक्षण कराया जाए, गौवंश और बछड़ों का रिकॉर्ड तैयार किया जाए, और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। साथ ही दोषियों पर मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की अमानवीय घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
यह मामला न केवल पशु क्रूरता का है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट

