Friday, October 2, 2026

दो लावारिस शवों को मिली सम्मानजनक विदाई, शालू सैनी बनीं अंतिम सहारा।





मुजफ्फरनगर, 8 जून 2026।

जब किसी व्यक्ति का इस दुनिया में कोई अपना नहीं बचता, तब उसकी अंतिम यात्रा अक्सर बेबसी और उपेक्षा की कहानी बन जाती है। लेकिन मुजफ्फरनगर की समाजसेवी क्रांतिकारी शालू सैनी उन असहाय और लावारिस मृतकों के लिए उम्मीद की आखिरी किरण बनकर सामने आ रही हैं। उन्होंने एक बार फिर मानवता की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया।

रविवार को शालू सैनी ने एक ही दिन में दो अलग-अलग स्थानों से मिले असहाय मृतकों के शवों का पूरे सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार कराया। पहली सूचना ककरौली थाना क्षेत्र से प्राप्त हुई, जबकि दूसरी सूचना नई मंडी थाना क्षेत्र से मिली। दोनों मामलों में मृतकों का कोई परिजन या वारिस सामने नहीं आया था।

सूचना मिलते ही शालू सैनी ने बिना देर किए अंतिम संस्कार की व्यवस्था संभाली। नई मंडी श्मशान घाट पर दोनों मृतकों को पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान मौजूद लोगों ने देखा कि जिन मृतकों का इस संसार में कोई अपना नहीं था, उनके लिए शालू सैनी स्वयं परिवार की भूमिका निभा रही थीं।

अंतिम संस्कार के दौरान माहौल भावुक हो गया। कई लोगों की आंखें नम हो गईं, क्योंकि आज के समय में जहां लोग अपने रिश्तों से भी दूरी बना लेते हैं, वहीं शालू सैनी अनजान और असहाय मृतकों के लिए बेटी, बहन और वारिस बनकर खड़ी दिखाई देती हैं।

इस अवसर पर शालू सैनी ने कहा कि “मृत्यु के बाद हर व्यक्ति को सम्मानजनक विदाई मिलना उसका मूल अधिकार है। जिन लोगों का इस दुनिया में कोई नहीं होता, उनके लिए मैं हमेशा उनकी वारिस बनकर खड़ी रहती हूं। मेरा उद्देश्य केवल सेवा करना नहीं, बल्कि हर दिवंगत आत्मा को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देना है।”

स्थानीय लोगों ने उनके इस मानवीय कार्य की सराहना करते हुए कहा कि शालू सैनी वर्षों से लगातार लावारिस, अज्ञात और असहाय मृतकों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार कर रही हैं। उनका यह कार्य न केवल मानवता की सेवा है, बल्कि समाज को संवेदनशील बनाने का भी एक बड़ा संदेश है।

आज जब समाज में संवेदनाएं लगातार कम होती दिखाई दे रही हैं, ऐसे समय में शालू सैनी का यह प्रयास इंसानियत को जीवित रखने का काम कर रहा है। उनका समर्पण यह साबित करता है कि किसी भी धर्म, जाति या पहचान से ऊपर मानवता होती है, और अंतिम समय में किसी बेसहारा व्यक्ति को सम्मान देना सबसे बड़ी सेवा है।

शालू सैनी का यह कार्य समाज के लिए प्रेरणा है और यह संदेश देता है कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।यह संस्करण समाचार पत्र, पोर्टल और सोशल मीडिया प्रकाशन के लिए उपयुक्त है तथा मामले की गंभीरता और मानवीय पक्ष को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।

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