सीएमओ कार्यालय पर किसानों का धरना, 18 बिंदुओं वाला ज्ञापन सौंपकर दी आंदोलन की चेतावनी।
खबर उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर से है।
बुधवार को मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल में कथित भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और मरीजों के शोषण के आरोपों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (तोमर) ने बड़ा प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों और किसानों ने सीएमओ कार्यालय पहुंचकर धरना प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान किसानों में जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर भारी आक्रोश दिखाई दिया। संगठन ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में गरीब किसानों और आम मरीजों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है और इलाज के नाम पर खुलेआम वसूली की जा रही है।
भारतीय किसान यूनियन (तोमर) द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कुल 18 गंभीर बिंदु उठाए गए हैं। संगठन का कहना है कि जिला अस्पताल का कैंसर विभाग अक्सर बंद रहता है, जिससे मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके अलावा ऑपरेशन और अन्य इलाज के नाम पर सुविधा शुल्क लेने के आरोप लगाए गए हैं। किसानों ने कहा कि गरीब मरीजों को इलाज के लिए मजबूर होकर पैसे देने पड़ते हैं और जो पैसा नहीं दे पाता उसे कई दिनों तक परेशान किया जाता है।
ज्ञापन में अस्पताल की सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में गंदगी की स्थिति बनी रहती है, जबकि मरीजों से अलग-अलग नामों पर पैसे वसूले जाते हैं। किसानों का कहना है कि यदि कोई मरीज अस्पताल में भर्ती होता है तो उससे 20 से 30 हजार रुपये तक की मांग की जाती है और सुविधा शुल्क न देने पर इलाज प्रभावित किया जाता है।
भाकियू (तोमर) ने आरोप लगाया कि अस्पताल में डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवाइयां लिखते हैं और बाहरी जांच केंद्रों पर भेजा जाता है। संगठन के अनुसार जिला अस्पताल के अंदर ही निजी जांच और कमीशनखोरी का खेल चल रहा है। ज्ञापन में कहा गया कि कई डॉक्टर बाहरी लैब संचालकों से कमीशन लेकर मरीजों को वहीं जांच कराने के लिए भेजते हैं।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि अल्ट्रासाउंड कराने के नाम पर मरीजों से सुविधा शुल्क लिया जाता है। ज्ञापन में कहा गया कि यदि कोई व्यक्ति पैसे नहीं देता तो उसे कई दिनों तक परेशान किया जाता है। वहीं ब्लड की आवश्यकता होने पर भी कथित रूप से सुविधा शुल्क मांगने के आरोप लगाए गए हैं।
ज्ञापन में महिला वार्ड की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि डिलीवरी के दौरान महिलाओं से पैसे वसूले जाते हैं। इसके अलावा अस्पताल स्टाफ द्वारा मरीजों और तीमारदारों के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने की बात भी कही गई है।
भाकियू (तोमर) ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में कुछ डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचते और केवल जूनियर या इंटर्न डॉक्टर ही मरीज देखते हैं। संगठन का कहना है कि कई डॉक्टर निजी फीस लेकर अपने आवास पर मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिससे सरकारी अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
ज्ञापन में एक बड़ा आरोप यह भी लगाया गया कि अस्पताल में नियुक्तियों और अल्ट्रासाउंड सेंटर के लाइसेंस तक में पैसों का खेल चल रहा है। किसानों ने आरोप लगाया कि नए कर्मचारियों से कथित रूप से हजारों रुपये लिए जाते हैं।
भारतीय किसान यूनियन (तोमर) ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। संगठन ने अस्पताल में सक्रिय दलालों और भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही जिला अस्पताल में विशेष जांच समिति बनाकर “चेक अभियान” चलाने की भी मांग उठाई गई है।
प्रदर्शन के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि पांच दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो भारतीय किसान यूनियन (तोमर) अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की होगी।
जिला अस्पताल से जुड़े इतने गंभीर आरोप सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और किसानों की मांगों पर क्या कार्रवाई होती है।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट।

