मुजफ्फरनगर जनपद के सदर ब्लॉक क्षेत्र का मखियाली गांव अब सिर्फ प्रदूषण की मार नहीं झेल रहा, बल्कि यह गांव धीरे-धीरे पलायन की त्रासदी का चेहरा बनता जा रहा है। कभी खेती, खुशहाली और आबादी से गुलजार रहने वाला यह गांव आज जहरीले पानी, दूषित जमीन और बढ़ती बीमारियों के कारण खाली होने लगा है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि एक किसान परिवार अपना घर-बार, खेत-खलिहान और वर्षों पुरानी यादें छोड़कर गांव से पलायन कर चुका है, जबकि कई अन्य किसानों ने अपने मकानों और जमीनों पर खुलेआम “पलायन… मकान बिकाऊ है” जैसे पोस्टर लगा दिए हैं। यह दृश्य अब पूरे इलाके में डर और बेचैनी पैदा कर रहा है।
बताया जा रहा है कि मखियाली, चांदपुर, भडौला, कासमपुर और आसपास के गांवों के पास संचालित कुछ पेपर मिलों से निकलने वाला दूषित पानी लगातार खेतों, नालों और जमीन में छोड़ा जा रहा है। यह जहरीला पानी अब जमीन के भीतर पहुंच चुका है, जिससे भूजल बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जो पानी कभी जीवन देता था, वही आज बीमारी और मौत का कारण बनता जा रहा है। खेतों की उपज कम हो रही है, फसलें खराब हो रही हैं और पशुओं तक पर इसका असर दिखाई देने लगा है।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की जांच में क्षेत्र में कैंसर, टीबी, निमोनिया और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीज मिलने की बात सामने आई है। कई परिवारों का आरोप है कि घर-घर में कोई न कोई व्यक्ति लंबे समय से बीमार है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक लगातार बीमार पड़ रहे हैं, जिससे गांवों में भय का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन, प्रदूषण विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते चले गए। अब जब लोगों ने अपने घरों पर “मकान बिकाऊ है” और “पलायन” के पोस्टर लगाने शुरू कर दिए हैं, तो यह सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं बल्कि पूरे इलाके के भविष्य पर खड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।
इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए मीरापुर विधायक मिथलेश पाल ने मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखकर पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। विधायक ने पत्र में साफ लिखा है कि पेपर मिलों द्वारा छोड़ा जा रहा प्रदूषित पानी ग्रामीणों के जीवन के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। उन्होंने प्रदूषण फैलाने वाली मिलों पर कठोर कार्रवाई, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और प्रभावित गांवों के लोगों की मेडिकल जांच कराने की मांग उठाई है।
अब सवाल सिर्फ प्रदूषण का नहीं रहा… सवाल यह है कि क्या मखियाली जैसे गांव बच पाएंगे, या जहरीला पानी एक-एक करके पूरे इलाके को खाली करा देगा?
मुजफ्फरनगर में यह मामला अब सिर्फ पर्यावरण संकट नहीं, बल्कि गांवों के अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट

