“जहर बना पानी: 94% लोगों के खून में क्रोमियम”
कानपुर देहात | 25 अप्रैल 2026
कानपुर देहात के रानियां औद्योगिक क्षेत्र में क्रोमियम का जहरीला कचरा अब एक बड़े स्वास्थ्य संकट में बदल चुका है। यहां की ज़मीन, हवा और खासकर पानी में जहर इस कदर घुल चुका है कि गांवों की पूरी आबादी इसकी चपेट में आती जा रही है। हालत यह है कि लोग मजबूरी में वही दूषित पानी पी रहे हैं, क्योंकि सुरक्षित पानी की कोई ठोस व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है।
हाल ही में राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में कैंप लगाकर 336 लोगों के खून के नमूने लिए। जब इनकी जांच डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में हुई, तो रिपोर्ट ने चौंका दिया। जांच में 315 लोगों यानी करीब 94 प्रतिशत के खून में क्रोमियम की मात्रा खतरनाक स्तर से अधिक पाई गई।
यह खुलासा साफ तौर पर बताता है कि रानियां क्षेत्र एक गंभीर स्वास्थ्य आपदा की ओर बढ़ रहा है। लोगों में डर और गुस्सा दोनों है। उनका कहना है कि अगर यही पानी नहीं पिएंगे, तो जिंदा कैसे रहेंगे।
सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए कई दावे किए। आईआईटी कानपुर को जांच और समाधान के लिए बजट भी दिया गया। क्रोमियम डंपिंग साइट के चारों तरफ बाउंड्री बनाने की योजना भी बनी। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। सालों से कानपुर-करंज रोड किनारे पड़ा जहरीला कचरा आज भी वहीं मौजूद है और लगातार आसपास के भूजल को प्रदूषित कर रहा है।
प्रशासन ने सरकारी हैंडपंप तो बंद कर दिए, लेकिन वैकल्पिक पानी की व्यवस्था पूरी नहीं कर सका। ऐसे में ग्रामीणों ने निजी हैंडपंप लगाकर फिर उसी जहरीले पानी का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने अगली सुनवाई में सरकार से सिर्फ 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है कि अब तक जमीनी स्तर पर क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
फिलहाल, रानियां का यह इलाका सरकारी दावों और हकीकत के बीच फंसा हुआ है—जहां हर दिन लोग जहर पीकर जीने को मजबूर हैं, और यह सवाल अब भी बाकी है कि इस खामोश खतरे से उन्हें कब और कैसे राहत मिलेगी।

