चरथावल क्षेत्र में नहर टूटने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। शुक्रवार को घिससुखेड़ा गांव के पास एक बार फिर नहर टूट गई, और देखते ही देखते पानी आसपास के खेतों में फैल गया। कुछ ही घंटों में सैकड़ों बीघा जमीन पानी में डूब गई, जिससे गेहूं, गन्ना और अन्य फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं।
किसानों के मुताबिक, नहर अचानक टूटी, जिससे उन्हें अपनी फसल बचाने का कोई मौका ही नहीं मिला। खेत देखते ही देखते तालाब बन गए और सालभर की मेहनत पर पानी फिर गया। कई किसानों ने बताया कि उन्होंने खेती के लिए कर्ज लिया था, जो अब फसल खराब होने के कारण चुकाना मुश्किल हो जाएगा।
घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश देखने को मिला। किसानों ने सिंचाई विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नहर की खराब हालत को लेकर कई बार शिकायत की गई थी, लेकिन समय रहते कोई मरम्मत नहीं की गई। अगर पहले ध्यान दिया जाता, तो इतनी बड़ी नुकसान की नौबत नहीं आती।
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक पंकज मलिक ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने एसडीएम सदर से फोन पर बात कर अधिकारियों को मौके पर भेजने और तुरंत राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीम मौके पर पहुंची और नहर को बंद करने के साथ मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने की बात कही है, ताकि नुकसान का आकलन कर किसानों को मुआवजा दिया जा सके। लेकिन किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें जल्द आर्थिक मदद नहीं मिलती, तब तक उनकी हालत संभलना मुश्किल है।
इस घटना के बाद किसान संगठनों ने भी सख्त रुख अपना लिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द मुआवजा नहीं दिया गया और नहर की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
लगातार हो रही नहर टूटने की घटनाओं ने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और सरकार इस समस्या का स्थायी समाधान कब तक निकाल पाती है, ताकि किसानों को बार-बार इस तरह की तबाही का सामना न करना पड़े।

