उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत अब आम लोगों के साथ-साथ शिक्षण संस्थानों को भी प्रभावित करने लगी है। बड़ौत के पंचमुखी मंदिर परिसर में स्थित संस्कृत गुरुकुल में गैस सिलेंडर न मिलने की वजह से गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। यहां पढ़ने वाले करीब 50 बटुकों के भोजन की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
गुरुकुल में लंबे समय से रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। कई बार प्रयास करने के बावजूद जब गैस सिलेंडर नहीं मिला तो गुरुकुल प्रबंधन को मजबूर होकर पारंपरिक चूल्हा बनवाना पड़ा। अब इसी चूल्हे पर सुबह और शाम का खाना तैयार किया जा रहा है।
स्थिति यह है कि गुरुकुल में पढ़ने वाले बटुक ही बारी-बारी से खाना बनाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। शिफ्ट के अनुसार कुछ बटुक लकड़ी और ईंधन की व्यवस्था करते हैं, जबकि कुछ रसोई में खाना बनाने का काम संभालते हैं। पढ़ाई के साथ-साथ यह अतिरिक्त जिम्मेदारी उनके लिए चुनौती बन गई है, लेकिन मजबूरी में उन्हें यह व्यवस्था अपनानी पड़ रही है।
गुरुकुल प्रबंधन का कहना है कि कई बार गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की कोशिश की गई, लेकिन घरेलू गैस की कमी के चलते सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। इससे गुरुकुल की रसोई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना समय लेने वाला और कठिन काम है, जिससे बच्चों की पढ़ाई का समय भी प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही गुरुकुल को गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया गया तो यहां की व्यवस्था और ज्यादा कठिन हो सकती है। वहीं गुरुकुल प्रबंधन ने प्रशासन और गैस एजेंसियों से मांग की है कि शिक्षा और बच्चों की सुविधा को देखते हुए जल्द से जल्द गैस सिलेंडर की व्यवस्था कराई जाए, ताकि गुरुकुल की रसोई फिर से सामान्य रूप से चल सके।

