मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल होने आए चार अभ्यर्थियों का भविष्य उस समय संकट में पड़ गया जब गूगल मैप की कथित गलत लोकेशन के कारण वे अपने परीक्षा केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच सके। परीक्षा छूटने के बाद अभ्यर्थियों में भारी निराशा और रोष देखने को मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और गूगल को नोटिसनुमा पत्र भेजने की तैयारी की जा रही है।
जानकारी के अनुसार गाजियाबाद और हापुड़ जनपद के चार अभ्यर्थियों की परीक्षा रविवार सुबह पहली पाली में नई मंडी थाना क्षेत्र के पटेल नगर स्थित दीपचंद ग्रीन चैंबर इंटर कॉलेज में आयोजित थी। सभी अभ्यर्थी समय से परीक्षा केंद्र पहुंचने के लिए मोटरसाइकिल से निकले थे और रास्ते की जानकारी के लिए गूगल मैप का इस्तेमाल कर रहे थे।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि गूगल मैप ने उन्हें परीक्षा केंद्र की सही लोकेशन दिखाने के बजाय शामली जनपद के चंदहेड़ी गांव के जंगल क्षेत्र की ओर पहुंचा दिया। गलत रास्ते पर पहुंचने के कारण उनका काफी समय बर्बाद हो गया। जब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ तो वे तत्काल वापस परीक्षा केंद्र के लिए रवाना हुए, लेकिन तब तक परीक्षा शुरू हो चुकी थी और निर्धारित समय निकल जाने के कारण उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया।
परीक्षा छूटने के बाद चारों अभ्यर्थी जिला मुख्यालय पहुंचे और अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई। अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने समय से घर से प्रस्थान किया था, लेकिन तकनीकी गलती की वजह से वे परीक्षा नहीं दे सके। उनका कहना है कि एक छोटी सी लोकेशन त्रुटि ने उनके लंबे समय से किए जा रहे पुलिस भर्ती के सपने पर पानी फेर दिया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने अभ्यर्थियों को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय भेजा, जहां उनकी मुलाकात एसपी सिटी अमृत जैन से हुई। एसपी सिटी ने अभ्यर्थियों की पूरी बात सुनी और उन्हें आश्वस्त किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
एसपी सिटी अमृत जैन ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रतीत हो रहा है। जांच के बाद गूगल को एक पत्र भेजा जाएगा, जिसमें यह पूछा जाएगा कि संबंधित परीक्षा केंद्र की लोकेशन के स्थान पर अभ्यर्थियों को शामली क्षेत्र की लोकेशन क्यों दिखाई गई। उन्होंने बताया कि परीक्षा छूटने वाले चार अभ्यर्थियों में दो हापुड़ और दो गाजियाबाद जनपद के निवासी हैं। साथ ही भर्ती बोर्ड से भी इस संबंध में बातचीत की जा रही है ताकि अभ्यर्थियों के पक्ष को उचित मंच पर रखा जा सके।
यह घटना एक बार फिर तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता से जुड़े जोखिमों को सामने लाती है। एक ओर जहां डिजिटल नेविगेशन लोगों की सुविधा बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर किसी भी तकनीकी त्रुटि का खामियाजा कई बार युवाओं को अपने करियर और भविष्य के रूप में भुगतना पड़ सकता है।

