नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 को वापस लेने का निर्णय लिया है। इसे देशभर के गन्ना किसानों, विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के हितों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। किसानों से जुड़े संगठनों और प्रतिनिधियों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे किसानों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने और उनके हितों की रक्षा करने वाला फैसला बताया है।
कुछ दिन पूर्व नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के भविष्य तथा प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 को लेकर विस्तृत चर्चा हुई थी। इस बैठक में किसानों की ओर से गन्ना मूल्य निर्धारण, भुगतान सुरक्षा, चीनी मिलों की जवाबदेही तथा किसानों के अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया था।
बैठक के दौरान किसानों ने आशंका जताई थी कि प्रस्तावित आदेश के कुछ प्रावधान भविष्य में गन्ना उत्पादकों के हितों को प्रभावित कर सकते हैं। किसानों के प्रतिनिधियों ने सरकार के समक्ष यह मांग रखी थी कि किसी भी नए प्रावधान को लागू करने से पहले किसानों के हितों और उनकी आर्थिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
इसके बाद केंद्र सरकार ने मामले पर विचार करते हुए गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 को वापस लेने का निर्णय लिया। किसानों का मानना है कि इस फैसले से गन्ना मूल्य, भुगतान व्यवस्था और किसानों के अधिकारों से जुड़े मौजूदा संरक्षण को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय को किसान हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। विभिन्न किसान संगठनों और किसानों ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी चिंताओं को सुनकर सरकार ने सकारात्मक निर्णय लिया है।
गन्ना किसानों का कहना है कि कृषि क्षेत्र से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में किसानों की भागीदारी और सुझावों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका मानना है कि संवाद और सहमति के आधार पर लिए गए फैसले किसानों तथा कृषि क्षेत्र दोनों के लिए लाभकारी साबित होते हैं।
फिलहाल गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 को वापस लेने के फैसले के बाद किसानों के बीच संतोष का माहौल है। किसान संगठनों ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी किसानों के हितों से जुड़े विषयों पर सरकार इसी प्रकार संवाद बनाए रखेगी और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक पहल करेगी।
प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से भी किसानों से अपील की गई है कि वे कृषि नीतियों से संबंधित आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें तथा किसी भी प्रकार की भ्रामक या अपुष्ट सूचना से बचें।यह खबर गंभीर, संतुलित, तथ्यात्मक और प्रकाशन/वेबसाइट के लिए उपयुक्त शैली में तैयार की गई है।

