Friday, October 2, 2026

गन्ना कानून पर किसानों की बड़ी चेतावनी, जयंत चौधरी से हुई अहम बैठक!

गन्ना कानून पर किसानों की बड़ी चेतावनी, जयंत चौधरी से हुई अहम बैठक

मुजफ्फरनगर के गन्ना किसानों से जुड़े मुद्दे अब केंद्र सरकार तक पहुंच गए हैं। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने गन्ना किसानों की परेशानियों को लेकर केंद्रीय मंत्री Jayant Chaudhary से महत्वपूर्ण मुलाकात की। दिल्ली स्थित आवास पर हुई इस बैठक में किसानों के भविष्य, गन्ने के दाम, भुगतान और चीनी मिलों की व्यवस्था को लेकर गंभीर चर्चा हुई।

बैठक में भाकियू (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक और युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह शामिल रहे। करीब एक घंटे तक चली बातचीत में प्रस्तावित ‘गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026’ पर विस्तार से मंथन किया गया। किसान नेताओं ने साफ कहा कि अब गन्ने का मूल्य केवल चीनी उत्पादन के आधार पर तय नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग उठाई कि चीनी के साथ-साथ एथेनॉल, शीरा और अन्य सह-उत्पादों से होने वाली कमाई को भी गन्ने के दाम तय करने में शामिल किया जाए, ताकि किसानों को उनकी फसल का सही लाभ मिल सके।

बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा चीनी मिलों के बीच तय दूरी का भी उठा। भाकियू नेताओं ने कहा कि दो चीनी मिलों के बीच दूरी की बाध्यता खत्म होनी चाहिए, क्योंकि इससे किसानों को बेहतर विकल्प और प्रतिस्पर्धा का फायदा मिलेगा। इसके अलावा कोल्हू और क्रेशर की स्पष्ट परिभाषा तय करने की मांग भी रखी गई, ताकि छोटे स्तर पर काम करने वाले किसानों और व्यापारियों को बेवजह कार्रवाई और प्रशासनिक दबाव का सामना न करना पड़े।

किसान नेताओं ने ‘इंस्पेक्टर राज’ पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि गन्ना विभाग और संबंधित अधिकारियों की लगातार दखलंदाजी से किसान परेशान रहते हैं। इसलिए इन अधिकारों को सीमित कर राज्य सरकारों के अधीन लाने की जरूरत है, ताकि व्यवस्था सरल और पारदर्शी बन सके।

बैठक में गन्ना भुगतान और बकाया राशि का मुद्दा भी बेहद गंभीरता से उठाया गया। नेताओं ने कहा कि किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिलने से आर्थिक संकट बढ़ता जा रहा है। इसके समाधान के लिए रियल टाइम डेटा सिस्टम लागू करने का सुझाव दिया गया, जिससे किसान अपने भुगतान की स्थिति तुरंत देख सकें और मिलों की जवाबदेही तय हो सके।

भाकियू नेताओं के मुताबिक केंद्रीय मंत्री Jayant Chaudhary ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुना और इन्हें भारत सरकार के सामने रखने का भरोसा दिया। संगठन का मानना है कि अगर इन सुझावों पर अमल होता है तो गन्ना किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी और लंबे समय से चली आ रही कई समस्याओं का समाधान निकल सकता है।

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