Thursday, October 1, 2026

खाई में पलटी स्कूल बस, बाल-बाल बचे 50 से ज्यादा बच्चे।



मेरठ के दौराला क्षेत्र में बुधवार सुबह एक बेहद गंभीर हादसा सामने आया, जिसने एक बार फिर स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। बच्चों से भरी एक स्कूल बस अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगभग 10–12 फीट गहरी खाई में पलट गई। बस में करीब 50 से 55 छात्र सवार थे, जिनकी जान पर इस हादसे के दौरान बन आई।

बताया जा रहा है कि यह बस खेड़ी टप्पा-लावड़ मार्ग स्थित सेंट मैरी एकेडमी स्कूल की थी, जिसका संचालन आसिफ ट्रांसपोर्ट द्वारा किया जा रहा था। रूट नंबर-1 की इस बस को चालक रूमान चला रहा था। बस रोजाना की तरह उरला, चिंदौड़ी, लावड़ और मवीमीरा गांवों से बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। लेकिन अझौता मोड़ पार करते ही अचानक बस का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे खाई में पलट गई।

हादसे के तुरंत बाद बस के अंदर चीख-पुकार मच गई। बच्चे डर और दर्द से चिल्लाने लगे, जिससे आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों, खेतों में काम कर रहे किसानों और बच्चों को छोड़ने जा रहे अभिभावकों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू किया। जैनपुर गांव के देवेंद्र, मवीमीरा के जोनित, खेड़ी के अमित, कपिल भाटी, राहुल भाटी और अजौता गांव के एक किसान सहित कई लोगों ने बहादुरी दिखाते हुए बस के शीशे तोड़कर बच्चों को बाहर निकाला।

घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया। कुछ बच्चों को हल्की चोटें आईं, जिन्हें स्कूल में प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायलों में अवनी, शौर्य शर्मा, युवान, देवांग, खुशी, प्रियांग और दीपांग समेत कई छात्र शामिल हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि हादसे के बाद बस चालक बच्चों को घायल अवस्था में छोड़कर मौके से फरार हो गया। इस घटना ने अभिभावकों के गुस्से को और भड़का दिया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंचे और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जमकर हंगामा किया। उन्होंने स्कूल ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। फरार चालक की तलाश जारी है। इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर सिर्फ दिखावे के अभियान चलाए जाएंगे और कब बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।

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