Friday, October 2, 2026

क्रांति दिवस पर वीर हवलदार मातादीन वाल्मीकि को श्रद्धांजलि!



क्रांति दिवस की पूर्व संध्या पर मेरठ के दिल्ली रोड स्थित ऐतिहासिक शहीद स्मारक में भारतीय वाल्मीकि आदि धर्म समाज भारत द्वारा वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक वीर हवलदार मातादीन वाल्मीकि सहित सभी क्रांतिकारी अमर बलिदानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजसेवी, बुद्धिजीवी, युवा और विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए।

इस अवसर पर आयोजित विचारगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1857 की क्रांति की शुरुआत मेरठ की पावन धरती से हुई थी और वीर हवलदार मातादीन वाल्मीकि ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष की ऐसी चेतना जगाई, जिसने पूरे देश में स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। वक्ताओं ने उनके योगदान को देश के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय बताते हुए कहा कि समाज को उनके आदर्शों और संघर्ष से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महेश टाँक ने की, जबकि मंच संचालन प्रदेश अध्यक्ष लोकेश टंडन और प्रदेश कोषाध्यक्ष रविन्द्र वैद ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान वाल्मीकि के मूल मंत्र के उच्चारण से हुआ। इसके बाद उपस्थित लोगों ने क्रांतिकारी अमर बलिदानियों को पुष्प अर्पित कर और मोमबत्तियां प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि दी।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि वीर हवलदार मातादीन वाल्मीकि केवल एक नाम नहीं, बल्कि देशभक्ति, स्वाभिमान और सामाजिक जागरूकता के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास में उनके योगदान को वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसके वे वास्तविक हकदार थे। समाज के लोगों ने इस अवसर पर युवाओं से इतिहास को जानने और राष्ट्रहित में सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील भी की।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने देश के क्रांतिकारी वीरों के आदर्शों पर चलने, समाज में एकता और जागरूकता को मजबूत करने तथा राष्ट्रभक्ति की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

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