नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आज संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में टैक्स व्यवस्था, वित्तीय घाटा, राज्यों को सहायता, विदेश पैसा भेजने के नियम और कारोबारी प्रक्रियाओं से जुड़ी कई अहम घोषणाएं कीं। इस बजट में सरकार का फोकस टैक्स सिस्टम को सरल बनाने, वित्तीय अनुशासन कायम रखने और विकास को गति देने पर साफ नजर आया।
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1 अप्रैल 2026 से लागू होगा नया इनकम टैक्स एक्ट
वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू किया जाएगा। सरकार का कहना है कि नए कानून में पुराने और जटिल प्रावधानों को हटाकर टैक्स नियमों को ज्यादा सरल, स्पष्ट और पारदर्शी बनाया गया है। इसका मकसद टैक्सपेयर्स और विभाग के बीच विवाद को कम करना और अनुपालन को आसान बनाना है।
सरकार के मुताबिक, नए कानून से टैक्स नोटिस, अपील और लंबी कानूनी प्रक्रियाओं में कमी आएगी, जिससे आम करदाता को राहत मिलेगी।
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छोटे टैक्सपेयर्स के लिए नई स्कीम
बजट 2026-27 में छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक नई स्कीम का प्रस्ताव रखा गया है। इस स्कीम के तहत टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा, ताकि छोटे और मध्यम आय वर्ग के लोग बिना डर और परेशानी के टैक्स फाइल कर सकें। सरकार का दावा है कि इससे टैक्स अनुपालन बढ़ेगा और ईमानदार करदाताओं को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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आईटीआर फाइल करने वालों को बड़ी राहत
वित्त मंत्री ने वेतनभोगी कर्मचारियों और छोटे करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए घोषणा की कि
👉 ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने की अंतिम तारीख अब 31 जुलाई होगी।
पहले तय समयसीमा के कारण कई बार टैक्सपेयर्स को तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। डेडलाइन बढ़ने से लाखों लोगों को समय पर और सही तरीके से रिटर्न भरने का मौका मिलेगा।
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इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं
इस बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पुराने और नए टैक्स सिस्टम दोनों पहले की तरह ही लागू रहेंगे। सरकार ने साफ किया कि फिलहाल उसका ध्यान टैक्स स्ट्रक्चर बदलने से ज्यादा टैक्स सिस्टम को मजबूत और सरल बनाने पर है।
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डिजिटल और यूजर-फ्रेंडली टैक्स फाइलिंग
सरकार ने बताया कि आईटीआर फॉर्म को और सरल बनाया गया है। साथ ही पूरी टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को डिजिटल और यूजर-फ्रेंडली किया गया है, ताकि आम आदमी बिना किसी तकनीकी परेशानी के टैक्स भर सके। इससे रिफंड प्रक्रिया भी तेज होने की उम्मीद है।
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राजकोषीय घाटा घटाने की दिशा में सरकार
वित्त मंत्री ने संसद को बताया कि सरकार ने वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दी है।
वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा GDP का 4.4% रहने का अनुमान
2026-27 में यह घटकर 4.3% होने की उम्मीद
सरकार का कहना है कि घाटा कम करते हुए भी विकास की रफ्तार बनाए रखी जाएगी।
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राज्यों के लिए बड़ी राहत
बजट में राज्यों के लिए भी बड़ा ऐलान किया गया है।
👉 वित्त वर्ष 2027 में राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये की ग्रांट दी जाएगी।
इससे राज्यों को बुनियादी ढांचे, सामाजिक योजनाओं और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन मिलेंगे।
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डेट और उधारी की स्थिति
सरकार ने वित्तीय स्थिति को लेकर साफ तस्वीर पेश की है—
डेट-टू-GDP रेश्यो: 55.6%
नेट बॉरोइंग: 11.7 लाख करोड़ रुपये
सरकार का दावा है कि उधारी को नियंत्रण में रखते हुए अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा जाएगा।
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विदेश पैसा भेजने पर बड़ी राहत
बजट 2026 में लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश पढ़ाई और इलाज के लिए भेजी जाने वाली रकम पर लगने वाला
👉 TCS 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है।
इस फैसले से विदेश में पढ़ रहे छात्रों और इलाज कराने वाले परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा।
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TDS नियमों में स्पष्टता
टैक्स नियमों में भ्रम दूर करने के लिए सरकार ने साफ किया कि मानव संसाधन सेवाओं (HR Services) को ठेकेदारों को किए जाने वाले भुगतान की श्रेणी में रखा जाएगा।
👉 इन सेवाओं पर अब केवल 1% या 2% TDS लगेगा।
इससे कंपनियों के साथ-साथ श्रमिकों को भी राहत मिलेगी।
केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने टैक्स सिस्टम को सरल बनाने, टैक्सपेयर्स को राहत देने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया है। नया इनकम टैक्स एक्ट, आईटीआर की बढ़ी हुई डेडलाइन, विदेश पैसा भेजने पर कम टीसीएस और राज्यों को अतिरिक्त ग्रांट—ये सभी कदम सरकार की सुधार और संतुलन की नीति को दर्शाते हैं।

