मुजफ्फरनगर | 1 फरवरी 2025
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए आम बजट को लेकर किसानों और कृषि क्षेत्र में गहरी निराशा देखने को मिल रही है। किसान नेता धर्मेंद्र मलिक ने बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट देश की कृषि और किसानों को पूरी तरह “राम भरोसे” छोड़ने जैसा है। उन्होंने कहा कि यह बजट सिर्फ निराशाजनक ही नहीं, बल्कि किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करने वाला साबित होगा।
धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि सरकार ने कृषि को केवल उत्पादकता बढ़ाने के भरोसे छोड़ दिया है, जबकि किसान का वास्तविक कल्याण सिर्फ उत्पादन बढ़ने से नहीं होता। उत्पादन बढ़ाने के लिए अनुकूल मौसम, पर्याप्त पानी, उपजाऊ मिट्टी, अच्छी गुणवत्ता के बीज, खाद और कीटनाशक जरूरी होते हैं। यदि इनमें से किसी भी संसाधन की कमी होती है, तो उत्पादन घट जाता है और किसान को नुकसान उठाना पड़ता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों की आय फसल के अधिक उत्पादन से नहीं, बल्कि फसलों के उचित और लाभकारी मूल्य मिलने से बढ़ती है। बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), फसल लागत, बाजार व्यवस्था और किसानों को स्थायी आय सुरक्षा देने को लेकर कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं दिखता।
धर्मेंद्र मलिक ने यह भी कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि क्षेत्र को लेकर जो गंभीर चिंताएं सामने आई थीं, उनके समाधान का कोई स्पष्ट रोडमैप इस बजट में नहीं है। पिछले वर्षों में कृषि को लेकर की गई घोषणाओं का भी कोई लेखा-जोखा बजट में प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि बजट में कृषि क्षेत्र में किसी बड़े सुधार या सकारात्मक बदलाव का संकेत नहीं मिलता। खेती की बढ़ती लागत, कर्ज का बोझ, प्राकृतिक आपदाएं और बाजार की अनिश्चितता जैसे मुद्दों पर सरकार की चुप्पी बेहद चिंताजनक है।
अपने बयान के अंत में धर्मेंद्र मलिक ने कहा,
“आज भारत की कृषि सच में राम भरोसे है। सरकार ने किसानों को पूरी तरह भगवान के भरोसे छोड़ दिया है। अब किसानों को सरकार से नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम से ही उम्मीद बची है कि वे किसानों का कल्याण करें।”
यह बयान साफ तौर पर दर्शाता है कि इस बजट ने किसानों की उम्मीदों को गहरा झटका दिया है और आने वाले समय में किसान संगठनों का आक्रोश और तेज हो सकता है।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट

