Friday, October 2, 2026

ई-फार्मेसी के खिलाफ दवा बाजार बंद, मुज़फ्फरनगर में बढ़ा विरोध!



मुजफ्फरनगर। ऑनलाइन दवा बिक्री और बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों की भारी छूट नीति के खिलाफ देशभर में दवा कारोबारियों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। मंगलवार 20 मई को मुज़फ्फरनगर समेत पूरे देश में दवा बाजार बंद रखा गया। इस राष्ट्रव्यापी बंद में लाखों कैमिस्ट और दवा विक्रेताओं ने हिस्सा लेकर सरकार से ई-फार्मेसी पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

मुज़फ्फरनगर जिला कैमिस्ट एसोसिएशन ने भी बंद को पूरा समर्थन देते हुए कहा कि बिना पर्याप्त निगरानी के ऑनलाइन दवाओं की बिक्री सीधे लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ बनती जा रही है। एसोसिएशन का आरोप है कि कई ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म बिना डॉक्टर की सही जांच और वैध सत्यापन के दवाएं बेच रहे हैं, जिससे गलत दवा इस्तेमाल और नशे वाली दवाओं के दुरुपयोग का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ कैमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के मुताबिक देशभर के करीब 12.40 लाख दवा विक्रेता इस आंदोलन में शामिल हैं। संगठन का कहना है कि यदि ऑनलाइन दवा बिक्री पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो करीब 5 करोड़ परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। दवा व्यापारियों का आरोप है कि बड़ी कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर छोटे मेडिकल स्टोरों को बाजार से बाहर करने की कोशिश कर रही हैं।

कैमिस्ट संगठनों ने यह भी चिंता जताई कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर एंटीबायोटिक्स और कुछ संवेदनशील दवाओं की अनियंत्रित बिक्री हो रही है। इससे एंटी माइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या तेजी से बढ़ सकती है, जो आने वाले समय में देश के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने पर दवाओं का असर कम होने लगता है और इलाज मुश्किल हो जाता है।

जिला कैमिस्ट एसोसिएशन के जिलामंत्री अक्षय मित्तल ने कहा कि कॉरपोरेट कंपनियां भारी छूट देकर छोटे व्यापारियों के सामने अस्तित्व का संकट पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि गांव और कस्बों में मेडिकल स्टोर केवल व्यापार नहीं बल्कि जरूरत के समय लोगों की जीवनरेखा होते हैं। यदि छोटे मेडिकल स्टोर बंद होने लगे तो ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं की उपलब्धता पर भी गंभीर असर पड़ेगा।

एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि कोविड काल में जारी अस्थायी ई-फार्मेसी संबंधित अधिसूचनाओं को वापस लिया जाए, ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम लागू किए जाएं और छोटे व्यापारियों के लिए समान अवसर वाली नीति बनाई जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जा सकता है।

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