Friday, October 2, 2026

अस्पताल के बाहर बसों की अव्यवस्था पर भड़की भाकियू सेना, आंदोलन की चेतावनी।

मुज़फ्फरनगर। जिला चिकित्सालय के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन सेवा की बसों के लगातार खड़े रहने को लेकर विवाद गहरा गया है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) सेना ने इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि बसों के जमावड़े के कारण मरीजों, उनके परिजनों और एंबुलेंस की आवाजाही प्रभावित हो रही है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
भाकियू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज ग्रीड ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि जिला अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर अक्सर मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन सेवा की दो से तीन बसें लंबे समय तक खड़ी रहती हैं। इससे अस्पताल में आने वाले मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि कई बार आपातकालीन सेवाओं में लगी एंबुलेंस को भी रास्ता बनाने में कठिनाई होती है और चालक बस संचालकों की तलाश में समय गंवाते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इस प्रकार की अव्यवस्था किसी भी गंभीर मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। यदि समय पर एंबुलेंस को रास्ता नहीं मिला तो मरीज की जान तक जोखिम में पड़ सकती है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह तत्काल इस समस्या का समाधान करे।
भाकियू सेना ने आरोप लगाया कि अस्पताल गेट के बाहर बसों का लंबे समय तक खड़ा रहना एक प्रकार का अतिक्रमण है, लेकिन संबंधित विभाग और प्रशासन इस ओर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन सेवा की शुरुआत ग्रामीण क्षेत्रों को जिला और ब्लॉक मुख्यालयों से जोड़ने के उद्देश्य से की गई थी, ताकि गांवों के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके। लेकिन वर्तमान में अधिकांश बसें अपने निर्धारित ग्रामीण मार्गों पर संचालित होने के बजाय शहर और जिला मुख्यालय के आसपास ही अधिक दिखाई दे रही हैं।
इस मामले को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों से भी नाराजगी सामने आने लगी है। कई ग्राम प्रधानों ने जिलाधिकारी उमेश मिश्रा को पत्र भेजकर शिकायत की है कि मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन सेवा की बसें नियमित रूप से गांवों तक नहीं पहुंच रही हैं। इसके कारण ग्रामीणों को सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है और उन्हें आवागमन की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
भाकियू सेना ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएगी। संगठन पहले मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को ज्ञापन सौंपेगा और उसके बाद जिलाधिकारी से मिलकर अस्पताल के बाहर बसों के स्थायी रूप से खड़े होने पर रोक लगाने तथा ग्रामीण मार्गों पर बसों का नियमित संचालन सुनिश्चित कराने की मांग करेगा।
संगठन का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो जिलेभर के कार्यकर्ताओं को साथ लेकर आंदोलन शुरू किया जाएगा। भाकियू सेना ने चेतावनी दी है कि किसी भी संभावित आंदोलन और उससे उत्पन्न स्थिति की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थान पर यातायात व्यवस्था को लेकर उठे इस विवाद ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि मरीजों की सुविधा, एंबुलेंस की निर्बाध आवाजाही और ग्रामीणों को परिवहन सेवा का लाभ दिलाने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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